पूंजी बाजार अब ब्लॉगस्पॉट पर
शेयर बाजार और निवेश संबंधी जानकारी का मेरा चिट्ठा ’पूंजी बाजार’ अब वर्डप्रैस से ब्लॉगस्पॉट पर आ गया है। नया पता है
पुराने लेख वर्डप्रैस पर भी उपलब्ध रहेंगे। अभी पुराने पोस्टों से टिप्पणियां स्थानातरित नहीं हुई हैं। इन्हे धीरे धीरे नये चिट्ठे पर लाया जायेगा।
तो अब आपसे नये चिट्ठे पर पहले से ज्यादा और जल्दी जल्दी मुलाकात होती रहेगी।
सेंसैक्स में शामिल शेयर
आज दिवाकर प्रताप सिंह ने पूछा:
मुम्बई स्टाक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक जिसे संक्षेप में सेंसैक्स कहा जाता है, जो वहां के सर्वोच्च 30 शेयरों पर आधारित है। उन 30 शेयरों के नाम क्या है ?
तो यह है सैंसेक्स में शामिल शेयरों की सूची:
१. ए सी सी
२. बजाज आटो
३ . भारती टेलिवेंचर
४. भेल
५. सिप्ला लिमिटेड
६. डाक्टर रेडी लैब
७. ग्रासिम लिमिटेड
८. गुजरात अंबुजा सीमेंट
९. एच डी एफ सी
१०. एच डी एफ सी बैंक
११. हिंडेलको
१२. हिंदुस्तान लिवर
१३.आइसीआइसीआइ बैंक
१४. इन्फोसिस टैक्नोलोजी
१५. आईटीसी लिमिटेड
१६. लार्सन एंड टुर्बो
१७. महिंद्रा एंड महिंद्रा
१८. मारुति उद्योग
१९. नैशनल थर्मल पावर
२०. ओएनजीसी
२१. रैन्बैक्सी लैब
२२. रिलांयस
२३. रिलांयस काम्युनिकेशन्स
२४. रिलांयस एनेर्जी
२५. सत्यम कंप्यूटर्स
२६. स्टेट बैंक आफ इंडिया
२७. टाटा कंसलटैंसी
२८. टाटा मोटर्स
२९. टाटा स्टील
३०. विप्रो
स्रोत बीएसई
यहां आपको यह बता दें कि यह सूची समय समय पर बदलती रहती है तथा बीएसई आवश्यक्ता के अनुसार इस सूची में बदलाव करता रह्ता है मगर सूचकांक में कुल शेयरों की संख्या तीस ही रहती है।
कैसा हो आपका बीमा एजेंट
पिछली बार जब मैंने एक लेख लिख कर LIC के कुछ एजेंटों द्वारा की जा रही बदमाशी के बारे में चेताया था तो वादा किया था कि आपको बताऊंगा कि किस तरह से अपना बीमा एजेंट चुनें। आज आपको इसी के बारे में बताता हूं। किसी भी नये बीमा एजेंट के साथ कोई निवेश करने से पहले उसके बारे में निम्न बातों का पता लगायें :
1. क्या आप पड़ोस में रहते हैं? : यदि आपका एजेंट आपके क्षेत्र में ही कही रहता है तो आपको उस तक पहुंचने में आसानी होगी। एक बार उसके यहां जरूर हो कर आयें। आपको उसके बारे में सूचना प्राप्त करना आसान हो जायेगा। मगर उस ध्यान रखें कि आपको जरूरत होने पर ही प्लान लें, केवल पड़ोसी को खुश करने या पड़ोसी धर्म निभाने के लिये नहीं।
2. क्या वास्तव में आप यही काम करते हैं? : हैरान न हों। आप यह सवाल जरूर करें। अधिकतर बीमा एजेंट मुख्य रूप से कोई और काम करते हैं। यह उनका पार्ट टाईम जॉब ही होता है। थोड़ा सा अतिरिक्त पैसा कमाने के लिये। याद रखें, जिस काम से उसके घर की रोटी नहीं चलती वह उसे पूरे प्रोफेशनल तरीके से नहीं कर पायेगा। उतना समय भी नहीं दे पायेगा। फुलटाईम प्रोफेशनल एजेंट से ही हमेशा डील करें।
3. कितने साल का अनुभव है?: इस काम में लोग ज्यादा देर तक नहीं टिकते। एकदम नये एजेंट जो एक साल से भी कम समय से इस प्रोफेशन में आये हों से बचें। आप उनसे उनके ग्राहकों के बारे में जानें तथा यह भी पता लगायें कि उसने कितने नये ग्राहक पिछले एक साल में बनाये। यदि वह काफी लम्बी अवधी से लगातार अच्छा काम कर रहा है तो वह इस व्यवसाय में लम्बे समय तक टिकेगा। याद रखें कि बी्मा प्लान की अवधी हमेशा बहुत लम्बी होती है। आपका एजेंट लम्बी अवधी का खिलाड़ी होना चाहिये।
4. आपके पास अपना ऑफिस है? : यदि उसके पास अपना ऑफिस तथा संपर्क के लिये लैंडलाइन नंबर है तो यह बेहतर है। हो सके तो एक बार उसके ऑफिस भी हो आयें।
5. आप किस ब्रांच के लिये काम करते हैं? : हो सके तो उसकी ब्रांच में होकर आयें तथा उसके सेल्स ऑफिसर/ डेवलपमेंट ऑफिसर से मिल कर आयें। पता करें कि कोई समस्या आने पर शिकायत कहां की जा सकती है।
6. आपने यही प्लान मेरे लिये क्यों चुना?: यह जानना बहुत जरूरी है। इस सवाल के जवाब से आप को अंदाजा हो जायेगा कि एजेंट कितना प्रोफेशनल है। ध्यान दें कि वह बीमा आपकी जरूरत के हिसाब से आपको दे रहा है या अपना कमीशन बनाने के लिये। यदि एक एजेंट एक ही योजना बता कर कहता है कि यह बहुत अच्छा प्लान है ले लीजिये तो इससे बचें। वहीं यदि एजेंट पहले आपके परिवार के बारे में सारी जानकारी लेकर आपकी आयू, आपकी भविष्य की जरूरतों तथा जिम्मेदरियों के अनुसार ही कोई प्लान का सुझाव देता है तो यह ज्यादा प्रोफेशनल रवैया होगा।
7. आपको इसमें कितना कमीशन मिलेगा? : पूछने से हिचकायें नहीं। हो सकता है कि वह छिपा जाये। यह भी हो सकता है कि फट से जवाब दे दे। इससे आपको अंदाज हो जायेगा कि वह केवल अपनी कमाई के लिये ही तो कोई प्लान आपके मत्थे नहीं मढ़ रहा।
8. प्लान का ब्रोशर कहां हैं?: “जी आज ही खत्म हो गया।” हो सकता है आपको यही जवाब मिले। ब्रोशर पूरी तरह पढ़े और समझे बिना कभी कोई प्लान न लें। यदि एजेंट आपको ब्रोशर नहीं देता तो हो सकता है वह उसमें आपसे कुछ छिपा रहा है। कंपनी की साईट पर जा कर प्लान के बारे में जानकारी हासिल करें।
शेयरबाजार और बैल

महाश्क्ति के प्रमेंद्र प्रताप सिंह ने यह सवाल मुझसे दो तीन बार पूछा था। हर बार यही सोचता कि अगले किसी लेख में इस बारे में लिखूंगा। आज फिर जब उन्हों ने यही प्रश्न उठाया तो ज्यादा इंतजार न करवाकर टाईम निकाल उनका जवाब दे रहा हूं। उनका प्रश्न था कि
शेयर बाजार और बैल मे क्या सम्बन्ध ? क्यों शेयर बाजार के समाचारों के साथ बैल को भी चित्रित किया जाता है।
शेयर बाजार की अपनी एक भाषा होती है। जो लोग यह सोचते हैं कि बाजार तेजी के रुख में रहेगा तो लाभ की आशा में वे और शेयर खरीदना चाहते हैं इसीलिये उन्हें तेजड़िये कहते हैं। जो सोचते हैं कि बाजार में कीमतें गिरेंगी वे शेयरों को बेचना चाहते हैं तो उन्हें कहते हैं मदड़िये। इन्ही तेजड़ियों को बाजार में बुल्स यानी बैल कहा जाता है तथा मंदड़ियों को बियर यानी भालू। इसी लिये जब भी बाजार में तेजी आती है तो अगले दिन सेंसेक्स के ग्राफ के साथ बैल को चित्रित किया जाता है और जब बाजार तेजी से गिरते हैं तो भालू का चित्र दिखाया जाता है।
मान्यता है कि यह नाम इस जानवरों के हमला करने के तरीके से पड़ा। जब भी बैल हमला करता है तो अपने शिकार को नीचे से उठा कर उछाल देता है जबकि भालू अपने शिकार को हमेशा पंजों से नीचे की ओर दबाता है।
एल आई सी के कुछ एजेंट आजकल कुछ इस तरह के पर्चे बांट कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं जिसमें कहा गया है कि 30000 रु जमा करवा कर 16 लाख रु लें। आप सब से अनुरोध है कि इस तरह के किसी बहकावे में न आयें। यह पूरी तरह झूठ और फरेब पर आधारित है।
एल आई सी के उच्च अधिकारियों ने इसके लिये एक सर्कुलर भी निकाला है जिसका एक हिस्सा यहां दिया जा रहा है। इसमें लिखा है कि इस पर्चे की वजह से कार्पोरेशन को शर्मिंदा होना पड़ रहा है तथा यह लोगों के कार्पोरेशन पर 50 साल के विश्वास के साथ धोखा है। पूरे सर्कुलर की कापी मेरे पास है। आप भी अपने चारों ओर इस बारे में जागरुकता फैलायें जिस से लोग इस धोखे से बच सकें।
जल्द ही एक लेख लिख कर आपको बताऊंगा कि निवेश संबंधी फैसले लेते समय किस तरह के एजेंटों से व्यवहार करना ठीक रहेगा जिससे आपको कभी इस तरह का धोखा न हो।
(नोट : कल वित्त बजट पेश किया जायेगा। संभव है कि निजी करों के ढांचे तथा दरों में कुछ परिवर्तन किया जाये। यदि इससे संबधित कोई जानकारी चाहते हों या बजट के किसी भी पहलू पर कोई जिज्ञासा हो तो आप मुझे mailjpb at gmail dot com पर मेल कर सकते हैं। मैं कोशिश करुंगा कि आपको जवाब दे सकूं। बजट के दौरान तथा बाद में जीमेल चैट पर भी रहने की कोशिश करुंगा।)
आजकल लम्बी अवधि के लिये निवेश करने वालों के लिये यूलिप ULIP (Unit-Linked Insurance Plan) एक पसन्दीदा शब्द है। इसके उचित कारण भी हैं।
यूलिप निवेश का एक बहुत अच्छा जरिया है यदि आप लम्बी अवधि के लिये निवेशित रहना चहते हैं यानि 10 से 20 वर्षों के लिये । यदि आप कम अवधि के लिये निवेश करना चाहते हैं तो बेहतर है कि किसी कंसल्टेंट की सहायता से म्यूचल फंड में निवेश करें।
यूलिप और म्यूचल फंड में मुख्य अंतर है अधिभरों (charges) का ढांचा। यूलिप और म्यूचल फंड में बाकी सब समान होते हुए भी यूलिप में निवेश बेहतर हो सकता है अधिभारों में कमी के कारण । FMC फंड मेनेजमेंट चार्ज (इसकी हिंदी शायद होगी कोष प्रबंधन अधिभार) आमतौर पर यूलिप में 1.5% (किसी किसी कम्पनी में यह 0.8% तक कम होता है) होता है जबकी म्यूचल फंड में आमतौर पर FMC 2.5% के आसपास होता है।
इसीलिये लम्बी अवधि में जब आपका फंड बहुत बड़ा हो जाता है तो 1% का अंतर भी बहुत मायने रखता है और इससे यूलिप के शुरुआती खर्चों की भी आपूर्ती हो जाती है।
यूलिप और म्यूचल फंड में निवेश के दो उदाहरण लेते हैं जो कि 10% की समान दर से बढ़ रहे हैं।
एक आदमी 20 वर्ष के लिये 5 लाख रु के बीमा के साथ यूलिप प्लान लेता है जिसमें वह 1 लाख रु प्रति वर्ष निवेश करता है यदि उसका निवेश 10% की दर से बढ़ता है तो मियाद खत्म होने पर उसे रु 52,21,205/- मिलेंगे |
यही निवेश यदि म्यूचल फंड में किया जाता है और साथ में समान राशि की टर्म इंशोरेंस भी ली जाती है तो 10% की वृद्धी दर पर सभी समयोजनों के बाद मियाद खत्म होने पर रु 48,25,785/- मिलेंगे।
इस प्रकार आप देख सकते हैं कि 1% का अधिभारों में छोटा सा अंतर आपके धन को कितना अधिक बढ़ा सकता है।
यूलिप में आपको बीमा प्लान, बच्चों के प्लान तथा पेंशन प्लान भी मिल जायेंगे। आप इनमें रु 1500/- प्रति माह के न्यूनतम निवेश से भी शुरुआत कर सकते हैं। अधिकतर कम्पनियां ECS की सुविधा भी प्रदान करती हैं।
कैसे समझें तिमाही नतीजे
आज आईटी यानी सूचना तकनीक की विशाल कम्पनी इन्फोसिस ने अपने तिमाही नतीजे पेश किये। आइये जाने कि इन नतीजों को कैसे समझा जाये।
जहां बैलेंस शीट (आपको जानकर हैरानी होगी कि बैलेंश शीट को हिंदी में चिट्ठा भी कहा जाता है) कम्पनी की सेहत का आईना होती है वहीं प्रॉफिट एण्ड लॉस एकाऊंट (लाभ हानि खाता) कम्पनी की प्रगति का मापक होता है। उपर दिये लिंक से आप इन्फोसिस के तिमाही नतीजे विस्तार से पीडीएफ फाईल में डाऊनलोड कर सकते हैं अथवा यहां दी हुई इमेज फाईल से इसे समझ सकते हैं।
हम यहां आज केवल प्रॉफिट एण्ड लॉस एकाऊंट (लाभ हानि खाता) की बात करेंगे।
सबसे पहला मद है -
1.Income from Software services and products ( सॉफ्टवेयर सेवाओं एवं उत्पादों से आय)अधिकतर इस जगह मद होती है कुल बिक्री से आय (Income from Total Sale) : यहां आपको मिलेगी कम्पनी द्वारा दी गई तिमाही में की गई माल अथवा सेवाओं की बिक्री की रकम। कम्पनी कितनी गति से बढ़ (Growth कर) रही है यह इसी का सूचक है। यहां आप देखेंगे कि पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले इन्फोसिस लगभग 51% बढ़ी है।
2. Software development Expenses (सॉफ्टवेयर संवर्धन लागत) अधिकतर इस जगह मद होती है कुल क्रय लागत: यहां आपको मिलेगी कच्चे माल अथवा सेवाओं की आपूर्ति पर खर्च की गयी रकम। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि लागत की रकम यदि बिक्री की रकम के मुकाबले कम अनुपात में बढ़ती है तो यह कम्पनी के सेहत के लिये अच्छा है। यहां इन्फोसिस की लागत 53.89% से बढ़ी है।
3. Gross Profit (कुल लाभ) : कुल लाभ बिक्री और क्रय का अन्तर है। यहां कुल लाभ 47% बढ़ा है।
4. Operating Expenses (प्रभावित खर्चे): यहां कच्चे माल के अलावा माल अथवा सेवाओं के उत्पादन पर किये गये अन्य सभी खर्चे लिये जाते हैं। ध्यान रहे कि यह खर्चे जरूरी नहीं कि माल के उत्पाद के अनुपात में ही बढ़ें। क्योंकि कुछ खर्चे जैसे कि बिलडिंग का किराया या स्टाफ की तन्ख्वाह का माल के उत्पाद से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। यहां आने वाले मद इस पर भी निर्भर करते हैं कि कम्पनी किस क्षेत्र में कार्यरत है। इन्फोसिस के खर्चे 42% से बढ़े हैं।
5. Interest and Depreciation (ब्याज एवं अवमूल्यन): इन खर्चों का उत्पादन प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं होता इसलिये इन्हे अलग से गिना जाता है। आयकर की गणना में भी इनका अलग से महत्व है। ब्याज उधार ली गई पूजी पर दिया जाता है। बड़ी पूंजीगत कम्पनियां जहां बड़ी रकम उधार की पूंजी से लगी होती है वहां इस मद का मह्त्व बढ़ जाता है और ब्याज की दरों में परिवर्तन कम्पनी के लाभ पर असरकारक हो सकता है। यहीं यह भी देखने वाली बात है कि जैसे जैसे कम्पनी अधिक लाभ कमा कर उधार चुकता करती जाती है ब्याज की रकम कम होती जाती है और लाभ बढ़ते जाते हैं। अवमूल्यन वास्तव में एक काल्पनिक खर्चा है और कम्पनी इसकी अदायगी नहीं करती।
6. Other Income (अन्य आय) : ध्यान रहे की छोटी और महत्वहीन सी यह रकम आपको बहुत बड़ा धोखा दे सकती है। कभी कभी कम्पनी अपने किसी पुराने निवेश, प्लांट अथवा सम्पत्ती को बेच कर मोटी रकम इस मद में कमा लेती है मगर इस मद में आई बढ़ोतरी वास्तव में कम्पनी की आय में स्थायी बढ़ोतरी नहीं करती। कई बार शुद्ध आय में असाधारण बढ़ोतरी देख कर आनन फानन में कोई शेयर खरीद लिया जाता है मगर यह जरूर जांच लेना चाहिये कि आय में यह बढ़ोतरी कम्पनी के वास्तविक कर्यकलापों के कारण हुई है या अन्य आय के द्वारा।
7. Net Profit (शुद्ध आय) : यह वो रकम है जो करों को चुकाने के बाद कम्पनी के पास बचती है। हर निवेशक का वास्ता इस रकम से होता है। इस रकम का एक हिस्सा निवेशक को लाभांश के रूप मे मिलता है और शेष कम्पनी की पूंजी में जमा हो जाता है यानी इसे कम्पनी के विस्तार, उधार चुकाने अथवा दूसरी कम्पनियों का अधिग्रहण करने के लिये प्रयोग किया जा सकता है। यहां इन्फोसिस के शुद्ध लाभ में 51% की वृद्धि हुई है।
अगली बार देखेंगे EPS (प्रति शेयर आय), P/E ratio ( कोई सुझाये कि इसे हिंदी में क्या कहेंगे?) और इनका शेयरों की कीमत से संबंध।
जीवन बीमा जीवन का बीमा नहीं होता
बहुत ही अजीब सा फतवा निकाला है उलेमाओं ने कल। मुसलमान अपने जीवन का बीमा नहीं करवा सकता। क्यों? क्योंकि जीवन तो खुदा का दिया है और खुदा जब चाहे उसे वापिस ले सकता है। इंसान कौन होता है अपने जीवन का बीमा करवाने वाला। अब इस तरह के फतवे निकलते रहे तो हमारे जैसे लोगों का काम धंधा चौपट ही समझो। तो हमने अपना फर्ज समझा कि सबसे पहले इस गलत फहमी को दूर किया जाये।
जीवन बीमा नाम हो जाने से जीवन का बीमा नहीं होता। दुनिया की कोई कंपनी किसी के जीवन का बीमा नहीं कर सकती। जब कोई कंपनी किसी व्यक्ति का बीमा करती है तो यह नही होता कि उसे कुछ हो जाये तो उस में फिर से जान डाल दी जायेगी।
जीवन बीमा केवल बीमित व्यक्ति की मृत्यू की अवस्था में उसकी आय से होने वाली हानि से परिवार को सुरक्षा प्रदान करता है। (A protection against the loss of income that would result if the insured passed away)। आज के दौर में जब शहरों में हर दूसरा व्यक्ति कर्ज लिये मकान में रहता है तो इस अवस्था में जीवन बीमा की अवश्यक्ता और भी बढ़ जाती है।
यूं तो बीमा कितना होना चाहिये यह हर व्यक्ति के अपने हालात पर निर्भर करता है फिर भी एक साधारण समीकरण के अनुसार आप एक वर्ष में जितना कमाते हैं उस का आठ गुना राशि निकाल लें। इस में आप अपनी तरल संपत्तियां (Liquid assets) जैसे नकदी, बैंक जमा और म्यूचव्ल फंड आदि को घटा दें और अपनी देनदारियां जैसे लोन, बच्चों की जिम्मेदारी, अन्य कोई जिम्मेदारी(जैसे छोटी बहन की शादी का खर्चा या घर का कोई अपंग सदस्य जो आप पर निर्भर हो) को इस में जोड़ लें। इस प्रकार जो राशि आयेगी उतनी राशि का बीमा आपको अवश्य लेना चाहिये। याद रहे कि मुद्रास्फीति का असर क्या होगा यह भी समायोजित(Adjust) कर लें। इसके लिये मेरा पिछला लेख क्या आप जल्द रिटायर्ड होना चाहते हैं देखें।
यदि आप चाहते हैं कि आप का परिवार किसी भी अनहोनी की अवस्था में इसी रहन सहन ( Living Standard ) को हमेशा के लिये कायम रख सके तो गिन कर देखिये आपको कितने बीमा की आवश्यक्ता है।
इंन्फोसिस के चेयरमैन नारायनमूर्ती आज साठ साल की उम्र में रिटायर्ड हो रहे हैं। नारायनमूर्ती इस देश के हीरो हैं, बहुतों के आदर्श हैं मगर उनके जैसी सफलता हर कोई नहीं पा सकता।
मगर फिर भी हर किसी का एक सपना होता है कि एक उम्र तक इतना कमा और बचा लिया जाये कि उसके बाद रिटायर्मेंट के सुनहरे दिनों की जिंदगी को जी भर के जिया जाये।
पिछले सौ सालों में एक क्रान्ती हुई है, अनसुनी, अनदेखी, चुपचाप मगर हमारे बिल्कुल पास। शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धी है दीर्घायू। दुनिया भर में लंबी आयू की वजह से बुजुर्गों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धी हुई है। केवल भारत में ही 2001 में 7.70 करोड़ बुजुर्ग थे जो कि बढ़ कर 2025 में 17.70 करोड़ हो जायेंगे। हमारी औसत आयू अगले दस वर्षों में 85 हो जायेगी और आबादी का दस प्रतिशत 60 से उपर की उम्र का होगा।
एक और जहां उम्र बढ़ रही है वहीं खर्चे बढ़ रहे हैं।घटती ब्याज दरें और बढती मुद्रास्फीति आपकी जमा पूंजी पर दोधारी तलवार सा असर करती हैं। आप भी अगर कम उम्र में योजनाबद्ध तरीके से अपनी रिटायर्मैंट की योजना अपने कैरियर की शुरुआत में ही बना लेते हैं तो इस सब से बच सकते हैं। उदाहरण के लिये आजके एक करोड़ रुपये की वास्तविक कीमत 5% मुद्रास्फीती के चलते 15 सालों में केवल 48 लाख ही रह जायेगी। आज जिस चीज की लागत 100 रुपये है वो 15 सालों में लगभग 210 रुपये में मिलेगी।
अगर आप युवा हैं तो यह मत समझिये कि अभी तो बहुत टाईम है, बचा लेंगे। आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे उतना आपको कम बचाना पड़ेगा क्योंकि बाकी काम चक्रवृद्धी की शक्ती करेगी। जैसेकि एक पच्चिस वर्षिय युवा को केवल हर माह 5000/- रुपये ही बचाने होंगे जिससे उसे साठ की आयू में एक करोड़ की पूंजी मिल सके, मगर 35 वर्षिय व्यक्ती को इसके लिये हर माह 11000/- रुपये बचाने होंगे।







